धर्म की ज्योति'' सबसे ऊंची अवस्था -
मनुष्य धार्मिक बने और अपने- अपने धर्म को पहचाने ।संप्रदाय भले ही अनेक हो धर्म एक ही होता है, और धर्मवान, मनुष्य सदाचारी और सिलवान बन सकता है ।
सबसे ऊंची अवस्था- सबसे ऊंची अवस्था यह है कि मनुष्य सुख - दु:ख, हर्ष, सुख, जय पराजय, हानि, लाभ में एक जैसा ही रहे ना खुशी के समय फुले, नाराज किस में उदासी लाए यही द्वंदातीत अवस्था है यही मोक्ष है यही सबसे ऊंची अवस्था है ।
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