Friday, 25 December 2020

मनुष्य अपना शत्रु स्वयं और अपना मित्र स्वयं है, ना कोई शत्रु न कोई मित्र -

मनुष्य आप ही अपना मित्र और आप ही अपना शत्रु है--

मनुष्य अपना मित्र और आप ही अपना शत्रु है और कोई ना तो शत्रु है ना मित्र है,
                             


                                     परिस्थिति का यदि सदुपयोग  करें, तो वही परिस्थिति उद्धार करने वाली हो जाती है  ।
उदाहरण के लिए ध्रुव जी का दृष्टांत है,। ध्रुव जी से द्रोह रखने वाली मां सुरुचि प्यार करने वाली मां सुनीति और उदासीन नाराज बाबा तीनों ही कल्याण में से सहायक बने । अतः जो परिस्थिति प्राप्त हो उसका पूर्ण सदुपयोग करो यह मत सोचो कि अनुकूल परिस्थिति आएगी तब भजन करेंगे, वैसा कुछ हो जाए तब भजन करेंगे, छोरा  (लड़का) काम संभाल ले फिर भजन करेंगे, फिर नहीं होगा, किसी का हुआ नहीं  ।
 
कल को किसने देखा है ।

                                 अतः प्रत्येक अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति जो भी आपको प्राप्त है, उसका सदुपयोग करोगे तो वह आपके कल्याण में सहायक हो जायेगी ।

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