Monday, 21 December 2020

दूसरों की निंदा मत करो --

दुसरों की निन्दा नहीं करनी चाहिए-



मनुष्य को पर निंदा से बचना चाहिए । मनुष्य को सबसे अधिक सुख दूसरे की बुराई करने में मिलता है । क्योंकि दूसरे की बुराई में जो आनंद आता है वह अन्य किसी बात में नहीं आता । लेकिन जब खुद किसी की बुराई करता है तो उसका चेहरा भी खुद के सामने आता है और जो कमजोरियां उस मनुष्य में होती है वह खुद में आ जाती है ।
इसीलिए मनुष्य को दूसरे की निंदा से सदैव बचना चाहिए
निंदा करनी और सुनना भी हानिकारक है । अतः जितना समय पर निंदा करने के दूसरे की तरफ जाता है उतना ध्यान खुद चिंतन करने में लगानी चाहिए और आध्यात्मिक सफलता मनुष्य के लिए यह भी बहुत ही जरूरी है ।

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