ऐसे पूछने वाले को मैं ईश्वर ही समझता हूं , क्योंकि ईश्वर सबको देता है सबको भोजन पहुंचाता है। उस पर से मैं तो अंघा हूं, वह तो मुझे ढूंढ कर ही मेरे पास आता है। परन्तु हम आंख वाले होते हुए भी कभी ईश्वर को नहीं देख पाते।
मुकेशकुमार
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