Thursday, 28 May 2020

हम आंख वाले होते हुए भी कभी ईश्वर को नहीं देख पाते?

किसी अंधे मनुष्य से किसी ने पूछा, --बाबा । तुम्हें कुछ दिखाई देता है ? वह बोले नहीं बाबा दिखाएं और तो कुछ नहीं देता, दिन में दो बार ईश्वर को अवश्य देख लेता हूं। वह बोला कैसे ? कहने लगे जब कोई मुझसे पूछता है , क्या तुम भोजन करोगे ?वह भोजन देता है, ठंडा पानी पिलाता है ,सिवाय ईश्वर के मुझे यह कौन पूछेगा ?
                                                           ऐसे पूछने वाले को मैं ईश्वर ही समझता हूं , क्योंकि ईश्वर सबको देता है सबको भोजन पहुंचाता है। उस पर से मैं तो अंघा हूं, वह तो मुझे ढूंढ कर ही मेरे पास आता है। परन्तु हम आंख वाले होते हुए भी कभी ईश्वर को नहीं देख पाते।

                                                                मुकेशकुमार

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