Thursday, 21 May 2020

सम्मान-

प्राय  सम्मान देने की ट्रेनिंग घर से ही लेनी चाहिए। अपसंस्कृति के बढ़ते प्रभाव के चलते घर में ही सम्मान का जबरदस्त चीरहरण हो रहा है। घर परिवार के सदस्यों में बड़े -छोटे का लिहाज यदि नहीं रह गया है, तो ऐसे परिवार में कलह अशांति तनाव बना रहेगा,गोस्वामी तुलसीदास स्पष्ट करते हैं कि जहां सुमति दी होती है वहां संपत्ति होती है और जहां कुमति वहां विपत्तियां डेरा जमाए रहती है ! यहां संपत्ति से मतलब सुख शांति है और कुमति का असर अशांति तनाव तथा कलह।
तनाव भरे परिवार माहौल में रहने वाला समाज में आदर पूर्ण सम्मान नहीं प्राप्त कर सकता है,क्योंकि अंदर बाहर के भाव में सामंजस्य नहीं है तो जीवन में द्वंद बना रहेगा पहले आत्मा तो परमात्मा का आशय है ही कि व्यक्ति में यदि आत्मीयता है तो पराए लोग भी उसे हृदय से सम्मान देंगे। 
अतः अपने परिवार को परिवार समझे परिवारिक माहौल में आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें एक दूसरे को सम्मान दे और सम्मान ले।
                                                                धन्यवाद
                                                              मुकेश कुमार

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