तनाव भरे परिवार माहौल में रहने वाला समाज में आदर पूर्ण सम्मान नहीं प्राप्त कर सकता है,क्योंकि अंदर बाहर के भाव में सामंजस्य नहीं है तो जीवन में द्वंद बना रहेगा पहले आत्मा तो परमात्मा का आशय है ही कि व्यक्ति में यदि आत्मीयता है तो पराए लोग भी उसे हृदय से सम्मान देंगे।
अतः अपने परिवार को परिवार समझे परिवारिक माहौल में आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें एक दूसरे को सम्मान दे और सम्मान ले।
धन्यवाद
मुकेश कुमार
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