Saturday, 2 May 2020

ज्ञानपथ के दस आलोक

१. ईश्वर तो एक शक्ति ( पावर ) है, ना उसका कोई नाम है न         रूप। जिसने जो नाम रख लिया वही ठीक है।
२. उसको प्राप्त करने के लिए गृहस्थी त्याग कर जंगल में            भटकने की आवश्यकता नहीं , वह घर में रहने पर भी            प्राप्त हो सकता है ।
३. अभी तुमने ईश्वर देखा ही नहीं,उसे प्राप्त करने के लिए            पहले  उससे मिलो जिसने ईश्वर को  देखा है ।
४. अपने जीवन में आंतरिक प्रसन्नता लाओ। यह बहुत बड़ा 
     ईश्वरीय गुण है।
५. ज्ञान में शांति है, वह तुम्हें बाहर से नहीं मिलेगी। ज्ञान अंतर       में है। उसके लिए आंतरिक साधन करने होंगे।
६. अधिक समय तुम संसार के कामों में लगाओ, थोड़ा समय       इधर दो, लेकिन इतने समय के लिए तो संसार को भूल           जाओ।
७. दो काम साधाक के लिए बहुत ही आवश्यक है-एक तो          परिश्रम से भोजन कमाना और दूसरा अपने मन को हर           समय काम में लगाए रखना।
८. ज्ञान अनंत है। यदि एक गुरु उसे पूरा ना कर सके तो दूसरे       गुरू से प्यार करना चाहिए।
९. दुनिया के सारे काम करो लेकिन सेवक बनकर, मालिक           बन कर नहीं ।
१०. संसार में मेहमान बन कर रहो । यहां की हर वस्तु किसी          और की समझो । मैं और मेरा छोड़कर तू और तेरा का             पाठ सीखो ।

No comments:

Post a Comment