पवित्र भाव
जिस भाव से पुजा की जाती है वैसा ही फल भी मिलता है! इसी प्रकार जो गुरु को मनुष्य समझकर मिलते है उन्हे मनुष्य जैसा लाभ मिलता है जो महापुरुष समझकर मिलते है उसे महापुरुष जैसा लाभ मिलता है! हम मंदिर में भगवान की मूर्ति समझकर पूजा करते है तो उसे वैसा ही लाभ होता है और साक्षात परमात्मा समझकर पूजा करते हैं तो उसे वैसा लाभ मिलता है
अतएव मनुष्य को परमात्मा से अपनी भावना पवित्र करने की प्रार्थना करने की प्रार्थना करनी चाहिए!🙏
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