पवित्र भाव:-
जिस भाव से पूजा की जाती है वैसा ही फल भी मिलता है । यदि कोई मंदिर में भगवान की मूर्ति समझकर पूजा करता है तो उसे वैसा ही लाभ होता है और साक्षात परमात्मा समझ कर पूजा करता है तो वैसा ही लाभ मिलता है। इसी प्रकार जो गुरु से मनुष्य समझकर मिलते हैं उन्हें मनुष्य जैसा लाभ और महापुरुष समझकर मिलते हैं तो महापुरुष जैसा लाभ और आगे जब ईश्वर समझकर उसके सामने जाते हैं तो ईश्वर दर्शन का पूरा लाभ होता है ।
अतः मनुष्य को परमात्मा से अपनी भावना पवित्र करने की प्रार्थना करनी चाहिए ।
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