व्यवहारिक बातें और व्यवहारिक धर्म--
1, संत या सज्जनों की निंदा का पाप मनुष्य मारने के बराबर होता है,इसीलिए हरि भक्तों की ना तो निंदा करो और ना ही निरादर करो ?
२, भक्तों के लिए बहुत खाना अच्छा नहीं होता है इससे ह्रदय कठोर होता है, उसका तेज जाता रहता है, और इष्ट से दूर हो जाता है!
३,कम खाओ कम हों सोओ,इससे भजन में बड़ी सुविधा मिलती है और ऐसा मनुष्य साधन में जल्दी अग्रसर हो जाता है ।
४,धनीको और मालदारोको भजन का फल नहीं मिलता इसीलिए कि उनके तीन काम ही होते हैं पहला, अच्छे-अच्छे पदार्थ खाना दूसरा, बढ़िया कपड़ा पहनना और तीसरा, मुंह फाड़ फाड़ के बातें करना ऐसे लोग मरने के पश्चात भूखे और नंगे रखे जाते हैं !
५,ईश्वर से प्रेम करो उससे हर समय डरो ताकि पाप कर्म ना होने पाए । प्रेम से संबंध अच्छा होता है और वह कुकर्म से बचाता है।
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